कर्मयोद्धा दशरथ मांझी और लौंगी भुंइया को सलाम

 

 कर्मयोद्धा दशरथ मांझी और लौंगी  भुंइया को सलाम


कर्म योद्धा दशरथ मांझी और लौंगी मांझी जब जनहित के लिए अकेले संघर्ष कर रहे थे तब ये शासन-प्रशासन और मीडिया कहाँ सोई हुई थी.


क्यों, शासन-प्रशासन मदद करने के लिए आगे नही आया?


दशरथ मांझी की बीमार पत्नी को सही वक्त पर ईलाज ना मिलने से मृत्यु हो गई. अस्पताल तक जाने के लिए रास्ता बनाने के लिए जनप्रतिनिधि से लेकर जिलाधिकारी से भी मिले.

सरकार से मदद मांगने दिल्ली तक पैदल गए. किसी ने मदद नही की

 दशरथ मांझी खुद झेनी-हथौडा लेकर 22 वर्ष तक पहाड़ काट कर रास्ता बनाते रहे लेकिन किसी ने सुध तक नही ली



लौंगी भुंइया भी सिंचाई के लिए 30 वर्षों तक नहर खोदते रहे और उन्होंने 3KM तक नहर खोद दी.



ऐसे कर्म योद्धाओं को मेरा सलाम


लेकिन ऐसी शासन-प्रशासन पर थू है।


वक्त है जागिए हम प्रतिनिधि और सरकार इसलिए चुनते हैं कि हमारे देश राज्य की विकास करेंगें. 

लेकिन खुद के विकास में लग जाते हैं।

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